बगड़ (झुंझुनूं)। स्थानीय ज्योति विद्यापीठ सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शनिवार को शिक्षण गुणवत्ता को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक कार्यशाला एवं स्टाफ बैठक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय प्रबंधन, समन्वयक और समस्त शिक्षण स्टाफ ने भाग लिया।
कार्यक्रम में विद्यालय प्रबंधक चिरंजी लाल, समन्वयक श्रीमती कुसुम लता सहित सभी शिक्षक उपस्थित रहे।
अकादमिक निदेशक श्रीहरी कुलुर ने किया मार्गदर्शन
कार्यशाला के मुख्य वक्ता ज्योतिकिरण एजुकेशनल एवं चेरिटेबल ट्रस्ट, वापी (गुजरात) के अकादमिक निदेशक श्रीहरी कुलुर रहे।
उन्होंने शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, प्रभावी कक्षा प्रबंधन और विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों की व्यावसायिक दक्षता को बढ़ाना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को नई दिशा देना था।
इन महत्वपूर्ण विषयों पर हुई चर्चा
अपने संबोधन में श्रीहरी कुलुर ने कई महत्वपूर्ण शैक्षणिक विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। इनमें प्रमुख रूप से
- प्रभावी कक्षा प्रबंधन
- शैक्षिक योजना के सिद्धांत
- हम क्यों पढ़ाते हैं
- शिक्षकों के प्रकार
- आदर्श शिक्षक के गुण
- शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया
- कक्षा अनुशासन और नियम
- प्रदर्शन मूल्यांकन चार्ट
- खेल एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों का महत्व
- शिक्षा में तकनीक का प्रभावी उपयोग
जैसे विषय शामिल रहे।
शिक्षक की भूमिका केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं
श्रीहरी कुलुर ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षक की भूमिका केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच, नैतिक मूल्यों, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और तकनीकी दक्षता विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने शिक्षकों को कक्षा शिक्षण को अधिक रोचक, सहभागितापूर्ण और परिणामोन्मुख बनाने के लिए कई व्यावहारिक सुझाव भी दिए।
शिक्षकों ने साझा किए अनुभव
कार्यशाला के दौरान शिक्षकों ने शिक्षण संबंधी चुनौतियों, अनुभवों और संभावित समाधानों पर खुलकर चर्चा की।
इस संवादात्मक सत्र ने शिक्षकों को नए विचार, नई ऊर्जा और बेहतर शिक्षण दृष्टिकोण प्रदान किया।
विद्यालय प्रबंधन ने जताया आभार
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रबंधन ने अकादमिक निदेशक श्रीहरी कुलुर का आभार व्यक्त किया।
सभी शिक्षकों ने कार्यशाला से प्राप्त ज्ञान और सुझावों को अपने दैनिक शिक्षण कार्य में लागू करने का संकल्प लिया। विद्यालय परिवार ने विश्वास जताया कि ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य और विद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होंगे।





